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January 7, 2026 Author: Divya Gautom
सनातन धर्म में माघ मास को आत्मशुद्धि, साधना और पुण्यकाल माना गया है। इस मास को केवल पंचांग का महीना नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, संयम और सेवा भाव को बढ़ाने वाला पर्व माना जाता है। वर्ष 2026 में माघ मास 4 जनवरी से 1 फरवरी तक रहेगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस अवधि में किया गया स्नान, दान, जप, दीपदान और साधना सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। इस मास में संयमित जीवन, सात्विक आहार और सेवा भाव अपनाने से न केवल पापों का क्षय होता है, बल्कि जीवन में शांति, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। यही कारण है कि माघ मास को पुण्य का महासागर और सत्कर्म का विशेष समय कहा गया है।
शास्त्रों में माघ मास में दान को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार इस मास में अन्नदान, वस्त्रदान, तिलदान और घृतदान (घी का दान) करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में स्थिरता और समृद्धि आती है। शीत ऋतु में जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र, कंबल या अन्न देना न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि माघ मास में दान करने से पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है और पितृदोष भी कम होता है।
विशेष रूप से तिल दान को इस मास में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। शास्त्रों में तिल को पवित्रता, तप, संयम और संरक्षण का प्रतीक बताया गया है। तिल का सेवन, तिल से हवन और तिल का दान रोग, दरिद्रता और नकारात्मकता को दूर करने वाला माना गया है। साथ ही अन्नदान को महादान कहा गया है। श्रद्धा भाव से दिया गया अन्न जीवन में स्थिरता और समृद्धि लाता है।
माघ मास में दीपदान भी अत्यंत फलदायी माना गया है। विशेषकर नदी, तीर्थ या मंदिर में संध्या समय दीपदान करने से जीवन के अंधकार दूर होते हैं। दीप ज्ञान का प्रतीक है, और श्रद्धा भाव से जलाया गया दीप नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करके घर और मन में सकारात्मकता और शांति लाता है। शास्त्रों के अनुसार दीपदान आत्मा के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है और व्यक्ति को मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
साथ ही गंगा स्नान का महत्व भी इस मास में बहुत अधिक है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि माघ मास में गंगा स्नान सहस्रों यज्ञों के बराबर पुण्यदायक है। विशेष रूप से प्रयागराज के संगम तट पर स्नान जन्म-जन्मांतर के पापों का शमन करता है। ठंडी गंगा में स्नान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि तप, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक भी है।