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February 20, 2026 Author: Divya Gautam
होली के त्यौहार से ठीक आठ दिन पहले लगने वाले समय को होलाष्टक कहा जाता है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। वर्ष 2026 में होलाष्टक की शुरुआत 25 फरवरी से हो रही है, जो 3 मार्च यानी होलिका दहन तक रहेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से इसका प्रारंभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन आठ दिनों में ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र रहता है, जिसके कारण मानवीय निर्णय और कार्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
इस लेख के माध्यम से हम जानेंगे कि होलाष्टक के दौरान कौन से कार्य वर्जित हैं और इस समय का सही उपयोग आप कैसे कर सकते हैं। ग्रहों की इस उग्रता के बीच मन की सहजता बनाए रखना और संयम से काम लेना आपके लिए लाभकारी सिद्ध होता है।
साल 2026 में होलाष्टक की अवधि अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक रहेगी।
होलाष्टक प्रारंभ तिथि: 25 फरवरी 2026 (अष्टमी)
होलाष्टक समाप्त तिथि: 3 मार्च 2026 (पूर्णिमा – होलिका दहन)
होली (धुलेंडी): 4 मार्च 2026
प्रभाव: इन 8 दिनों में सभी 16 संस्कार वर्जित रहेंगे।
होलाष्टक लगते ही विवाह, सगाई और जनेऊ जैसे बड़े आयोजनों पर रोक लग जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि में ग्रहों का स्वभाव अशांत रहता है, जिसके कारण इस समय शुरू किए गए रिश्तों में तनाव या कलह की आशंका बढ़ जाती है। दांपत्य जीवन में आपसी तालमेल की कमी न रहे, इसके लिए इन कार्यों को टालना ही उचित है।
नया घर बनाना या गृह प्रवेश करना जीवन की बड़ी खुशी है, जिसके लिए सकारात्मक ऊर्जा अनिवार्य है। होलाष्टक के समय वातावरण में नकारात्मकता के कारण नई शुरुआत करना हानिकारक सिद्ध हो सकता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में किए गए कार्यों में बाधाएं आती हैं और घर की सुख-शांति प्रभावित हो सकती है।
मुंडन संस्कार बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास से जुड़े होते हैं। होलाष्टक की अवधि में ग्रहों के उग्र प्रभाव के कारण ये संस्कार वर्जित माने जाते हैं। माना जाता है कि इस अशुभ काल में किए गए संस्कारों का बच्चे के स्वास्थ्य और स्वभाव पर विपरीत असर पड़ सकता है। इन दिनों में अनुशासन का पालन करना भविष्य के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।
केवल घर ही नहीं, बल्कि नए व्यापार की शुरुआत या बड़े निवेश से भी इस समय बचना चाहिए। ग्रहों की उग्रता के कारण लिए गए फैसले अक्सर गलत साबित हो सकते हैं, जिससे आर्थिक हानि का डर बना रहता है। इस समय को नए कार्यों के बजाय केवल योजना बनाने और आत्म-मंथन के लिए प्रयोग करना चाहिए।
दान-पुण्य और सेवा कार्य
शास्त्रों में वर्णन है कि होलाष्टक के दौरान किया गया दान अत्यंत पुण्य प्रदान करता है। जरूरतमंदों को अनाज, वस्त्र, तिल या गुड़ का दान करना ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में मदद करता है। पशु-पक्षियों को दाना डालना और गाय की सेवा करना भी इस काल में बहुत शुभ माना गया है।
ईष्ट देव की आराधना
होलाष्टक के दौरान ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल होने के कारण मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है। इसे नियंत्रित करने के लिए मंत्र जाप सबसे उत्तम उपाय है। इस समय अपने ईष्ट देव, विशेष रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करना मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
घर की शुद्धि
इन आठ दिनों में प्रतिदिन शाम के समय घर में कपूर और गूगल की धूप जलाना चाहिए, जिससे नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। गंगाजल का छिड़काव और मुख्य द्वार पर शुद्ध घी का दीपक जलाना घर के वातावरण को पवित्र बनाए रखता है और परिवार के सदस्यों के बीच मधुर संबंध बनाए रखता है।
मानसिक शांति
इन आठ दिनों में ग्रहों की उग्रता के कारण स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता है, इसलिए किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचें। बेवजह की बहस मानसिक ऊर्जा को नष्ट करती है, जिससे अशांति बढ़ती है। मन की सहजता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन ध्यान लगाएं । यह अभ्यास आपको मानसिक रूप से स्थिर रखेगा और विषम परिस्थितियों में भी शांत रहने की शक्ति प्रदान करेगा।
सात्विकता
होलाष्टक की अवधि आत्म-शुद्धि के लिए समर्पित है, इसलिए तामसिक भोजन, मांस-मदिरा और नकारात्मक विचारों से पूरी तरह दूर रहें। यह समय किसी भी प्रकार के भौतिक प्रदर्शन का नहीं है, बल्कि अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण पाने का है। सात्विक आहार और पवित्र विचार आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, जो ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से आपकी रक्षा करने में पूरी मदद करते हैं।
धैर्य
ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति के कारण इस समय निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, इसलिए धैर्य का परिचय दें। किसी भी नए प्रोजेक्ट, भारी निवेश या जीवन के बड़े निर्णय को जल्दबाजी में न लें। संयम बनाए रखें और केवल योजना बनाने पर ध्यान केंद्रित करें। होली के बाद जब ग्रहों की स्थिति अनुकूल और शुभ हो जाए, तभी अपने कार्यों के सही संचालन के लिए अगला कदम बढ़ाना आपके हित में होगा।
प्रश्न 1: क्या होलाष्टक के दौरान बच्चों का जन्मदिन मनाया जा सकता है?
उत्तर: जन्मदिन एक उत्सव है जिसे आप सादगी से मना सकते हैं, लेकिन इस दौरान कोई बड़ा संस्कार या उत्सव जैसा आयोजन करने से बचना चाहिए। इस दिन मंदिर जाकर दान करना और दीप जलाना बच्चे के लिए कल्याणकारी रहता है।
प्रश्न 2: क्या इन आठ दिनों में नई गाड़ी या सोना खरीदना चाहिए?
उत्तर: ज्योतिषीय दृष्टिकोण से होलाष्टक में की गई खरीदारी में बाधाएं आने की आशंका रहती है। यदि बहुत आवश्यक न हो, तो नया वाहन या भारी निवेश को होली के बाद तक के लिए टाल देना ही बेहतर माना जाता है।
प्रश्न 3: क्या होलाष्टक का प्रभाव देश के सभी हिस्सों में एक समान होता है?
उत्तर: होलाष्टक का प्रभाव उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अधिक माना जाता है। दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में स्थानीय मान्यताओं के अनुसार नियम भिन्न हो सकते हैं, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों की उग्रता पूरे संसार को प्रभावित करती है।
प्रश्न 4: क्या होलाष्टक के दिनों में घर की साफ-सफाई या रिनोवेशन (मरम्मत) कर सकते हैं?
उत्तर: घर की सामान्य सफाई और पुरानी वस्तुओं को हटाना बहुत शुभ है। लेकिन घर को नया रूप देना, रंग-रोगन शुरू करना या तोड़-फोड़ वाला रिनोवेशन टालना चाहिए। इन दिनों में घर की शुद्धि करने से मन में सहजता आती है।
प्रश्न 5: क्या होलाष्टक में नौकरी बदलना या इंटरव्यू देना वर्जित है?
उत्तर: करियर से जुड़े सामान्य कार्य और इंटरव्यू रोके नहीं जाते, लेकिन नई नौकरी को ‘जॉइन’ करने के लिए होली के बाद का समय अधिक स्थिर माना जाता है। यदि टालना संभव न हो, तो दही-चीनी खाकर और ईष्ट देव का स्मरण करके ही नई शुरुआत करें।