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April 12, 2026 Author: Divya Gautam
इस साल वरुथिनी एकादशी का पावन व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा। वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की यह एकादशी बहुत ही फलदायी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी निष्ठा से भगवान विष्णु के ‘वराह’ रूप की पूजा करता है, उसके जीवन के पुराने कष्ट दूर हो जाते हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है। यह पावन पर्व हमें अपने मन को शांत रखने और व्यवहार में मधुरता लाने की प्रेरणा देता है। वरुथिनी एकादशी का अर्थ ही रक्षा करने वाला कवच माना गया है, जो जातक की हर संकट से रक्षा करता है। इस विशेष दिन पर सात्विक आचरण और शुद्ध आहार का पालन करना बहुत जरूरी है। यह दिन नई शुरुआत करने और जीवन को सही दिशा देने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
एकादशी तिथि शुरू: 13 अप्रैल 2026, सुबह 01:16 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 14 अप्रैल 2026, रात 01:08 बजे
व्रत पारण (खोलने) का समय: 14 अप्रैल 2026, सुबह 06:54 से 08:31 बजे तक
हरि वासर समाप्त होने का समय: 14 अप्रैल 2026, सुबह 06:54 बजे
व्रत की सफलता हमारे आचरण पर निर्भर करती है। यहां कुछ जरूरी बातें दी गई हैं जो आपको इस दिन ध्यान रखनी चाहिए:
दान का महत्व: वैशाख की गर्मी में जल, छाता, जूते या मिट्टी के घड़े का दान करना पुण्य माना गया है।
मधुर वाणी: अपनी बातचीत में हमेशा मिठास रखें और किसी का भी दिल न दुखाएं।
भक्ति भाव: भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं।
सात्विक जीवन: सादगी से रहें और अपना समय सकारात्मक विचारों में बिताएं।
भोजन का परहेज: इस दिन चावल, शहद और कांसे के बर्तन में भोजन करना वर्जित है।
व्यवहार में संयम: किसी की बुराई न करें, झूठ न बोलें और क्रोध से पूरी तरह दूर रहें।
तामसिक आहार: प्याज, लहसुन और भारी भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
दैनिक कार्य: आज के दिन बाल कटवाना, नाखून काटना या दिन में सोना शुभ नहीं माना जाता।
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि एकादशी पर नमक खाना चाहिए या नहीं। वरुथिनी एकादशी के व्रत में सेंधा नमक का सेवन पूरी तरह से सही माना जाता है। साधारण नमक के मुकाबले सेंधा नमक को सबसे शुद्ध माना गया है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से मिलता है और इसे साफ करने के लिए किसी बनावटी तरीके का उपयोग नहीं किया जाता।
पवित्र भोजन की श्रेणी में आने वाला यह नमक व्रत की शुद्धि को बनाए रखता है। चूंकि एकादशी पर अनाज मना होता है, इसलिए फलाहार तैयार करते समय केवल पहाड़ों से मिलने वाले शुद्ध सेंधा नमक को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। यह हमारी परंपराओं और सेहत दोनों के लिए अनुकूल है।
उपवास के दौरान शरीर को हल्का और ऊर्जावान बनाए रखना बहुत जरूरी है। सेंधा नमक पाचन में बहुत आसान होता है और शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखता है, जिससे थकान महसूस नहीं होती।
मुख्य आहार: कुट्टू, सिंघाड़ा या सामा के चावल से बने सात्विक व्यंजन।
तरल पदार्थ: ताजे फलों का रस, दूध, छाछ या नारियल पानी।
मिठाई: मखाने की खीर या दूध से बनी सात्विक चीजें।
अन्य: उबले हुए आलू, मूंगफली और सूखे मेवे।
सही फलाहार न केवल शरीर की अंदरूनी सफाई करता है, बल्कि आपके मन को भी स्थिर रखता है जिससे पूजा-पाठ में मन अधिक लगता है।
वरुथिनी एकादशी पर कुछ सरल उपाय करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और बिगड़े काम बनने लगते हैं। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार इन कार्यों को कर सकते हैं:
तुलसी पूजन: आज के दिन तुलसी की जड़ की मिट्टी का तिलक अपने माथे पर लगाएं, इससे मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है।
पीली वस्तुओं का भोग: भगवान विष्णु को केसर वाली खीर या पीले फलों का भोग जरूर लगाएं, ऐसा करने से घर में बरकत आती है।
दीप दान: शाम के समय घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
अभिषेक: यदि संभव हो तो दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान का अभिषेक करें, यह सौभाग्य बढ़ाने वाला माना जाता है।
दान पुण्य: वैशाख की गर्मी को देखते हुए किसी जरूरतमंद को जल या चप्पल का दान करें, इससे मानसिक सुख मिलता है।
वरुथिनी एकादशी कब है?
यह पावन व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
क्या इस दिन सेंधा नमक खा सकते हैं?
हां, व्रत के भोजन में शुद्ध सेंधा नमक का उपयोग करना पूरी तरह सही है।
व्रत खोलने का सही समय क्या है?
आप 14 अप्रैल को सुबह 06:54 से 08:31 के बीच व्रत खोल सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी पर चावल का सेवन शास्त्रों में पूरी तरह मना किया गया है।
पूजा में किन बातों का ध्यान रखें?
पीले कपड़े पहनें, भगवान को पीले फल चढ़ाएं और मन में अच्छे विचार रखें।
सुख-समृद्धि के लिए क्या करें?
तुलसी की जड़ की मिट्टी का तिलक लगाएं और केसर वाली खीर का भोग लगाएं।